जब प्रधानमंत्री ने एनडीटीवी के चीफ प्रणय रॉय को हैडमास्टर की तरह फटकारा

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आइए, आप को लिए चलते हैं, साल 2004 के लोकसभा चुनाव में। 2004 के आम चुनाव में भाजपा “शाइनिंग इंडिया” नारे के सहारे अपनी नाव दरिया पार लगाने की तैयारी कर रही थी। चुनाव होता है। साल 2004 अप्रैल महीने की 20 तारीख और मई महीने की 10 तारीख के बीच चार फेज़ में वोटिंग होती है। चुनाव आयोग 14 मई को चुनाव के नतीजे जारी करता है। चुनाव नतीजों से दो चीजें उड़ती हैं:- पहली सेंसेक्स की चमक और दूसरी जीत की आस लगाए बैठे भाजपा नेताओं की नींद।

शाइनिंग इंडिया नारे और पिछले साल 2003 में हुए तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव (राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़) में मिली जीत से 2004 के आम चुनाव में अपनी जीत के प्रति आश्वस्त भाजपा के होश-फाख्ता तब होते हैं। जब तमाम ओपिनियन पोल और राजनीति के फन्ने-खांओ द्वारा किये जा रहे भाजपा की जीत के दावों को गच्चा देते हुए, पिछले 8 साल से सत्ता-सुख से वंचित कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के साथ UPA की छतरी के नीचे सरकार बना लेती है।

Congress-led (UPA-United Progressive Alliance) की सरकार बनती है। डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनते हैं। कुंवर.नटवर सिंह को कैबिनेट में एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर का पद मिलता है। बस भैया भूमिका बहुत हुई। अब सीधा जिस पर बवाल कटा है और जो हेडिंग देख आप पढ़ने के लिए आए हैं, उसकी तरफ रुख करते हैं।

बवाल कुछ यूं है- फाइनेंसियल एक्सप्रेस, बिजनेस स्टैंडर्ड के चीफ एडिटर और यूपीए के पहले कार्यकाल में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइजर रहे “संजय बारू” साल2014 में आई अपनी किताब “बायोग्राफी cum मेमॉयर”,”द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर”में लिखते हैं- “सांसदों के बीच मंत्रालयों के आवंटन में अदल- बदल आम बात थी। साल 2005 में मई महीनें में जब यूपीए, सरकार में रहते हुए पूरे किए गए 1 साल की वार्षिकी मनाने जा रही थी, मीडिया में खबर आने लगी कि प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों की बीते 1 साल की परफॉर्मेंस की समीक्षा कर रहे हैं। मई महीने की 9 तारीख को जब प्रधानमंत्री रूस की राजधानी मॉस्को में थे।

एनडीटीवी ने एक स्टोरी चलाई कि प्रधानमंत्री की कैबिनेट में एक्सटर्नल अफेयर मिनिस्टर कुँवर नटवर सिंह को पीएम रिपोर्ट कार्ड में सबसे कम अंक मिले हैं। जिसके चलते शायद उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इस स्टोरी के चलते नाखुश नाराज नटवर सिंह स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए छुट्टी कर लेते हैं। हालाँकि, प्रधानमंत्री बाद में फोन कर स्वास्थ्य के बारे में पूछते हैं।

जब यह खबर प्रधानमंत्री तक पहुंचती है। बारु लिखते हैं की प्रधानमंत्री अत्यधिक क्रोधित हो जाते हैं और कहते हैं- “Tell Prannoy to stop reporting these lies”, बारू आगे लिखते हैं – कि मैंने प्रणय रॉय को फोन किया जो कि उन दिनों एनडीटीवी के हैड और वरिष्ठ सम्पादक हुआ करते थे। प्रधानमंत्री मुझसे फोन लेते हैं। वह प्रणय रॉय को इस तरह फटकार लगाते हैं। मानों वो प्रधानमंत्री नहीं,बल्कि प्रणय के पूर्व बोस हो और प्रणय रॉय सीनियर मीडिया एडिटर नहीं,बल्कि उनके जूनियर हो।

इस पर शिकायती लहज़े में प्रणय रॉय मुझसे कहते हैं- “Boy,I have not been scolded like that since school! He sounded like a headmaster, not a prime minister.”
मुझे इस तरह तो स्कूल में भी डाट नहीं पड़ी थी। प्रधानमंत्री,मुझें इस तरह डाँट रहें थे मानो, वो प्रधानमंत्री नहीं बल्कि, किसी स्कूल के हेडमास्टर और मैं उनका विद्यार्थी।

Author- Brijesh Gahlawat

EIN DESK

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