पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल असुरक्षित

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पाकिस्तान में अल्पसंख्यों पर हमले करना अब आम बात हो गई है, आये दिन अल्पसंख्यों पर हो रहे अत्याचारों पर अनेक खबरें सुनने को मिलती रहती है। कभी उनपर अत्याचार किया जाता है, तो कभी उनका धर्म परिवर्तन करने की कोशिश की जाती है , या फिर उनके धार्मिक स्थलों पर कब्ज़ा कर समूचे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई जाती है। हाल ही में सोमवार को पाकिस्तान के एक कट्टरपंथी मौलवी ने लाहौर में स्थित सिखों के ऐतिहासिक गुरुद्वारा शहीदी अस्थाना (भाई तारू सिंह जी) की जमीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की, इसके बाद उसने सिखों को धमकी भी दी है कि पाकिस्तान एक इस्लामी देश है और यहां पर सिर्फ मुस्लिम ही रह सकते हैं।

मुस्लिम पैगम्बर हजरत शाह काकु चिश्ती की दरगाह का स्वयंसेवी मौलवी सोहेल बट्ट दावत-ए-इस्लामी से जुड़ा हुआ है। मौलवी ने वहां के स्थानीय लोगों को साथ मिलाकर ऐतिहासिक गुरुद्वारा शहीदी अस्थाना की जमीन पर कब्जा कर लिया है। मौलवी ने यह दावा किया है कि , गुरुद्वारा और उसके आसपास की जमीन हजरत शाह काकु चिश्ती दरगाह और शहीदगंज मस्जिद की है।
सोमवार को भारत ने इस घटना के खिलाफ पुरजोर विरोध जताया है।

भारत ने इस घटना पर कड़े शब्दों में अपनी चिंता जाहिर की है और पाकिस्तान से कहा कि वे इस मामले की जांच करवाकर फौरन सुधारात्मक कदम उठाए।”

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने आने बयान में यह कहा है कि पाकिस्तान, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उसके धार्मिक अधिकारों और सांस्कृतिक धरोहर की वे रक्षा करे। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक खासकर हिन्दू और सिख के खिलाफ हो रहे अत्याचार को लेकर भारत की तरफ से पाक के सामने यह सबसे ताजा विरोध है।

इससे पहले भी पाकिस्तान में ऐसी ही कुछ घटनाऐं सामने आई है,जिसमे अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए गए।
कुछ समय पहले पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कृष्णा मंदिर की नींव रखवाने पर रोक लगा दी गई थी और उससे पहले, करतारपुर कॉरिडोर में स्थित ऐतिहासिक गुरद्वारे पर मुस्लिम समुदाय द्वारा गुरुद्वारे को घेर लिया गया और पथराव किया गया। ऐसे में वहां यात्रा करने आए भारतीय श्रद्धालु भी फंस गए थे।

आपको बता दें कि इस शहीदी स्थल पर भी तारू सिंह की याद में गुरुद्वारा बनाया गया था। जहां पर 1726 में मुगलकाल के दौरान वायसराय जकारिया खान ने इस्लाम धर्म को कबूल न करने पर उनका सर ,धड़ से अलग कर दिया गया था, इस घटना के कई सालों बाद यहां के स्थानीय लोगों ने भाई तारू सिंह की याद में गुरुद्वारा बनाया था।

Gurpreet

गुरुप्रीत वर्तमान समय में दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही एक्सप्रेस इंडिया न्यूज में संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।

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